अखिल भारतीय साहित्य परिषद्

काशी , युवा शोधार्थी पाठक आयाम द्वारा जिला लाइब्रेरी मेँ आनंद मठ पुस्तक पर चर्चा और युवाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित , संगठन मंत्री श्री मनोज जी ने उपस्थित सभी युवाओँ से संवाद किया

लखनऊ युवा शोधार्थी पाठक आयाम द्वारा अमीरुद्दौला लाइब्रेरी मेँ आनंद मठ पुस्तक पर चर्चा और युवाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित , संगठन मंत्री श्री मनोज जी ने उपस्थित सभी युवाओँ से संवाद किया ! कार्यक्रम में महामंत्री डॉ पवनपुत्र बादल भी उपस्थित रहे

भारत की आत्मा भारतीय साहित्यकारों में बसती है" ओम कृष्ण बिड़ला

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् राजस्थान का 9 वाँ प्रदेश महाधिवेशन कोटा में प्रारम्भ*

लोक सभा अध्यक्ष ओम कृष्ण बिरला ने किया विधिवत उद्घाटन

राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत दो दिवसीय इस महाधिवेशन में प्रदेशभर के सैकड़ों साहित्यकार भाग ले रहे हैं
कोटा 30 मई 2026
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् राजस्थान का नौवां प्रदेश महाधिवेशन शनिवार को प्रातः दस बजे कोटा के राजकीय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा एकीकृत महाविद्यालय तलवंडी में प्रारंभ हुआ।
उद्घाटन सत्र का प्रारंभ परिषद् गान से प्रारंभ हुआ तत्पश्चात मां भारती और मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलन कर इसकी विधिवत शुरुआत हुई।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि ओम कृष्ण बिरला ने कहा कि भारत की आत्मा भारत के साहित्यकारों में बसती है,उन्होंने रचनाकार के पावन दायित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की स्थापना का उद्देश्य भारतबोध, राष्ट्रभक्ति से युक्त भारतीयता रहा है जो अब ‘आत्मबोध से विश्वबोध ‘ जैसे उदात्त वैश्विक मानवीयता के मापदंड पर खरा उतर रहा है।
इस उद्घाटन सत्र के विशिष्ट अतिथि डॉ पवनपुत्र बादल ने भारतीय साहित्य के मानवीय मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत भूमि महान साहित्यकारों और विचारकों की भूमि रही है,उन्होंने कवि कालिदास और तुलसीदास के काव्य में निहित विराट मानवीय मूल्यों पर बात की।
इस सत्र का कुशल संचालन अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के प्रदेश महामंत्री डॉ केशव शर्मा ने किया।
उद्घाटन सत्र के बाद दोपहर का भोजनावकाश हुआ,उसके पश्चात तृतीय सत्र में ‘लोक मंथन की जानकारी,बाल साहित्य,युवा कार्य और लोक साहित्य ‘ पर चर्चा हुई इस सत्र के विशिष्ट वक्ता अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के राष्ट्रीय मंत्री भरत ठाकौर, अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ इंदु शेखर तत्पुरुष, प्रदेश अध्यक्ष डॉ अन्नाराम शर्मा ने विषय से संबंधित अपने विचार प्रकट किए।
इस सत्र का संचालन आखिल भारतीय साहित्य परिषद् के जयपुर प्रान्त के अध्यक्ष डॉ ओम प्रकाश भार्गव ने किया।

चतुर्थ सत्र में ‘ आदर्श इकाई एवं वार्षिक कलेंडर पर विस्तार से चर्चा हुई, इस सत्र के मुख्य वक्ता भरत ठाकौर, डॉ अन्ना राम शर्मा,पवनपुत्र बादल रहे।
इस सत्र में साहित्य परिषद् के साहित्यकारों की पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।
पंचम सत्र ‘संभागश बैठक दायित्व घोषणा और दायित्व बोध ‘ पर केंद्रित रहा। इसमें विविध दायित्व से संबंधित घोषणाएं की गई।
संध्याकाल में ‘संघ विषय पर केंद्रित काव्य ‘ का प्रदेश भर से आए हुए कवियों ने काव्यपाठ किया,इस तरह दिवस का उत्तरार्द्ध राष्ट्रीयता और देशभक्ति से ओतप्रोत रहा।
काव्य संध्या का संचालन कवि योगीराज योगी ने किया।

परिषद ने कोटाबाग(नैनीताल) के गिन्तीगांव में किया सामुदायिक बाल चौपाल का आयोजन

कोटाबाग
अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तराखंड (लोक साहित्य आयाम) एवं संकल्प यूथ फाउंडेशन (घोड़ा लाइब्रेरी) के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को सामुदायिक बाल चौपाल का आयोजन राजकीय प्राथमिक विद्यालय, गिन्तीगांव कोटाबाग में किया गया। इस अवसर पर नन्हे-मुन्ने बाल साहित्यकारों के बीच एक अत्यंत रोचक ‘कहानी सुनाओ प्रतियोगिता’ आयोजित की गई। कार्यक्रम में 150 से अधिक बाल साहित्यकारों में प्रतिभाग किया। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला विद्यार्थी कार्य प्रमुख नितिन बोरा, विशिष्ट अतिथि सौरभ पाण्डेय प्रदेश महामंत्री अखिल भारतीय साहित्य परिषद् एवं विशिष्ट वक्ता मोहन पाठक प्रदेश मंत्री अखिल भारतीय साहित्य परिषद् उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ममता गुप्ता ने की।

मुख्य वक्ता नितिन बोरा ने बाल चौपाल कार्यक्रम की सराहना करते हुए, लाइब्रेरी एवं पुस्तकों की महत्त्वता पर प्रकाश डाला। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के बाल साहित्य आयाम प्रमुख एवं घोड़ा लाइब्रेरी के संस्थापक, कार्यक्रम संयोजक शुभम बधानी ने बताया कि समुदायिक बाल चौपाल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में पुस्तक संस्कृति विकसित करने की दिशा में कार्य करना एवं बाल साहित्य के प्रति बच्चों की रुचि को और अधिक बढ़ाना था।

सामुदायिक बाल चौपाल में आयोजित कहानी सुनाओ प्रतियोगिता में कक्षा 5 के हर्षवर्धन ने प्रथम, लोहिताक्ष ने द्वितीय एवं सृष्टि ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सात अन्य प्रतिभागी बच्चों को सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए। सभी विजेताओं बाल साहित्यकारों को अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया। संकल्प यूथ फाउंडेशन द्वारा विद्यालय को बाल साहित्य की कुछ नवीन पुस्तकें भी भेंट की गई।

इस दौरान संकल्प यूथ फाउंडेशन के सुरेन्द्र पडलिया, दीपक पडलिया, विद्यालय शिक्षकगण प्रभा पांडे, सुभाष रस्तोगी, निर्मल तिवारी, मनीष गर्जोला, सविता शर्मा, सैलजा साह, प्रकाश तिवारी आदि उपस्थित रहे।

भारत के इस नव निर्माण में संघ शक्ति आधार है: कवि विनम्र सेन सिंह अखिल भारतीय साहित्य परिषद काशी प्रांत की ओर से जिला पंचायत सभागार में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन

प्रयागराज। अखिल भारतीय साहित्य परिषद काशी प्रांत की ओर से शनिवार को राष्ट्र साधना के 100 वर्ष के उपलक्ष्य में जिला पंचायत सभागार में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन और भारत मां के चित्र पर पुष्प अर्पित करके किया गया। इसके बाद साहित्य परिषद की ओर से सभी मंचासीन अतिथियों और कवियों को स्वागत किया गया।

इस मौके पर आमंत्रित कवियों ने राष्ट्रप्रेम और त्याग की कविताओं से समां बांध दिया। कार्यक्रम में विनीत चौहान ने मंच संचालन किया। कवि अभय निर्भीक ने ‘त्याग तपस्या ज्ञान संघ है, क्षमता का उत्थान संघ है, मातृभूमि को सदा पूजता भारत का सम्मान संघ है’ के माध्यम से समां बांध दिया। कवियित्री प्रियंका राय ने ‘मैं भारत की आनबान सम्मान की खातिर जीती हूं, मुरझाये चेहरों पर मैं मुस्कान की खातिर जीती हूं, जीते होंगे लोग यहां धन-दौलत शोहरत की खातिर, सच कहती हूं मैं तो हिन्दुस्तान की खातिर जीती हूं’ के माध्यम से श्रोताओं में जोश भर दिया। कवि दास आरोही आनन्द ने ‘हम प्रखर पुंज, हम तेजवंत हम पारस जैसे सजे हैं, हमको हल्के में मत लेना, हम भारत के बच्चे हैं’ के माध्यम से युवा जोश भरा। मध्यप्रदेश के भोपाल से आई नुसरत मेहंदी ने ’जन-जन में आत्मबोध जगाया है संघ ने, सर्वाेपरि है राष्ट्र सिखाया है संघ ने’ के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बारे में बताया। कवियित्री नेहा शर्मा ने अपनी कविता ‘हमेशा याद रखना तुम की ये धरती तुम्हारी है, ये गंगा गोमती सरयू, ये यमुना जी तुम्हारी है, तिरंगा भी तुम्हारा है, और भमवा तुम्हारा है, सनातन है तो सब कुछ है और हस्ती तुम्हारी’ के माध्यम से मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि प्रशांत अवस्थी ‘प्रखर’ ने अपनी कविता ‘सुनो कथानक कहता हूं मैं, है जिनकी कथा सुनहरी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक के संघी, सदा दंश के प्रहरी’ के माध्यम से श्रोताओं का मन मोह लिया।
गांव और ग्रामीण संस्कृति पर कविता लिखने वाली मनु वैशाली ने अपनी कविता ‘चप्पल पहन के जिनकी चलते थे शौक से हम तुम पूछते हो वैसे गांव में क्या रखा है’ के माध्यम से गांव से जुड़ाव की याद दिलाई। कवि डां. प्रवीण आर्य ने कविता ‘जननी जन्मभूमि का वंदन, आओ कर ले हम, वन्दे मातरम वन्दे मातरम।। राम कृष्ण को मातृभूमि से स्वर्ग लगा धीमा धीमा, चूमे चरण चांदनी भू के, भाल लगा के सर टीका, सुर नर मुनि तरसा करते, पाने को जहाँ जन्म, वन्दे मातरम वन्दे मातरम’ के माध्यम से समां बांध दिया। विख्यात मिश्र ने ‘सज गये सारंगधारी, संघ के कारण ही है, अब सजेंगे ब्रजबिहारी, संघ के कारण ही है’ के माध्यम से संघ का महत्व बताया। कार्यक्रम का संयोजन कर रहे कवि और शिक्षक डॉ. विनम्र सेन सिंह ने अपनी कविता ‘ एक दीप से जले हज़ारों यह अद्भुत विस्तार है, भारत के इस नव निर्माण में संघ शक्ति आधार है।’ के माध्यम से समां बांध दिया।

देश का भाग्य ही प्रत्येक नागरिक का भाग्य: रमेश जी
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि काशी प्रांत के प्रचारक रमेश जी ने कहा कि साहित्य परिषद सबके हित के कार्य को कवियों के माध्यम से रखने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश का भाग्य ही प्रत्येक नागरिक का भाग्य है। देश समर्थ, समृद्ध और विकसित होगा तो हम भी समर्थ, समृद्ध और विकसित होंगे। देश में शांति स्थापित रहेगी तो हम भी शांति के साथ जीवन यापन कर सकेंगे। संघ अपने स्थापना वर्ष से देशहित में कार्य कर रहा है। राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति के लिए संघ 100 वर्षों से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में धर्म, संस्कृति और समाज की खोई हुई पुनः स्थापित करने का कार्य अखिल भारतीय साहित्य परिषद कर रही है।
अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री पवनपुत्र बादल ने कहा कि साहित्य परिषद ने केवल हिंदी नहीं बल्कि सभी भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। भारत की एकात्मता का भाव लेकर लेकर साहित्य परिषद काम कर रहा है। उन्हेें राष्ट्र निर्माण के लिए साहित्य परिषद से जुड़ने का आग्रह किया। भारत की पुरातन, सनातन और वैदिक भाव को पुनः जागृति करने के लिए साहित्य परिषद कार्य कर रहा है। इस मौके पर स्वामी वैदेही वल्लभ सरकार ने कहा कि ब्रह्म से भी पहले शब्द की उत्पत्ति हुई। संघ तो वटवृक्ष है और संपूर्ण साधना सिखाता है।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सह-कोषाध्यक्ष कमलाकांत गर्ग, प्रदेश महामंत्री महेश पाण्डेय ‘बजरंग’ पूर्व आईजी केपी सिंह, प्रो. वाईपी सिंह, डा. अमरेंद्र त्रिपाठी, प्रो. रमेश सिंह, डा. स्नेहसुधा, अर्चना सिंह और प्रो. कल्पना वर्मा आदि मौजूद रहे।

प्रयागराज में “आत्मबोध से विश्वबोध” विषय पर डॉ. पवनपुत्र बादल का मुख्य वक्तव्य

प्रयागराज 14 फरबरी 2026 ! अखिल भारतीय साहित्य परिषद् काशी प्रान्त और हिंदुस्थानी अकादमी के संयुक्त तत्वाधान में प्रयागराज में आयोजित व्याख्यान आत्मबोध से विश्वबोध में अखिल भारतीय महामंत्री डॉ पवनपुत्र बादल का मुख्य बक्तव्य , भव्य आयोजन

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